दीक्षा केवल भेष नहीं, जीवन की दिशा परिवर्तन है : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
मधुबन (गिरिडीह)-- : विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने गुणायतन के नवीन जिनालय स्थित सभा मंडप में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “दीक्षा लेना केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने का संकल्प है।” उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं, बल्कि संयम, तप और त्याग के मार्ग पर अग्रसर होना है। यह दुर्लभ मानव जीवन मोक्षमार्ग की प्राप्ति के लिए मिला है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।मुनि श्री ने कहा कि भोग-विलास से क्षणिक सुख तो मिल सकता है, लेकिन स्थायी शांति नहीं। इससे मन में आसक्ति और अशांति बढ़ती है। व्यक्ति हमेशा “थोड़ा और” की चाह में उलझा रहता है, जिससे तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती और संतोष दूर होता जाता है।उन्होंने कहा कि श्रद्धालु केवल दीक्षा देखने नहीं, बल्कि अपने भीतर वैराग्य जागृत करने के लिए आएं। यदि दीक्षा से मन में वैराग्य उत्पन्न हो जाए, तो ही यहाँ आना सार्थक है।गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 18 अप्रैल को प्रातः 9:30 बजे भव्य शोभायात्रा निकलेगी तथा 10 बजे से पावन तीर्थधाम गुणायतन में मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के सान्निध्य में ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें तीन वैराग्यवान आत्माएं संयम जीवन को अंगीकार करेंगी। कार्यक्रम के अंतर्गत ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, पाद-प्रक्षालन एवं अतिथियों के उद्बोधन के साथ प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी द्वारा दीक्षा विधि संपन्न कराई जाएगी।
दीक्षार्थियों में क्षुल्लक श्री समादरसागर जी, ब्रह्मचारी सारांश जी एवं ब्रह्मचारी रूपेश जी शामिल हैं। इनके जीवन परिचय से स्पष्ट है कि तीनों ने कम आयु में ही वैराग्य और संयम का मार्ग अपनाने का दृढ़ निश्चय किया है।
आयोजन को लेकर देशभर के जैन समाज में विशेष उत्साह है और हजारों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। गुणायतन परिसर में लगभग 20 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं भोजन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई है।इसी क्रम में 16 अप्रैल को प्रातः भगवान नमिनाथ के मोक्ष कल्याणक अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज के सान्निध्य में पहाड़ पर चरण अभिषेक एवं वंदना की गई। वहीं संध्या में शंका समाधान के पश्चात दीक्षार्थियों की मेहंदी रस्म संपन्न हुई।
17 अप्रैल को प्रातः अभिषेक, शांतिधारा एवं गणधर वलय विधान के साथ मुनि श्री की मंगल देशना आयोजित होगी।आयोजन समिति ने देशभर के जैन धर्मावलंबियों से इस ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव में सहभागी बनने का आह्वान किया है।


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