दीक्षा केवल भेष नहीं, जीवन की दिशा परिवर्तन है : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
मधुबन (गिरिडीह)-- : विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने गुणायतन के नवीन जिनालय स्थित सभा मंडप में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “दीक्षा लेना केवल वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने का संकल्प है।” उन्होंने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भोग-विलास नहीं, बल्कि संयम, तप और त्याग के मार्ग पर अग्रसर होना है। यह दुर्लभ मानव जीवन मोक्षमार्ग की प्राप्ति के लिए मिला है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।मुनि श्री ने कहा कि भोग-विलास से क्षणिक सुख तो मिल सकता है, लेकिन स्थायी शांति नहीं। इससे मन में आसक्ति और अशांति बढ़ती है। व्यक्ति हमेशा “थोड़ा और” की चाह में उलझा रहता है, जिससे तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती और संतोष दूर होता जाता है।उन्होंने कहा कि श्रद्धालु केवल दीक्षा देखने नहीं, बल्कि अपने भीतर वैराग्य जागृत करने के लिए आएं। यदि दीक्षा से मन में वैराग्य उत्पन्न हो जाए, तो ही यहाँ आना सार्थक है।गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 18 अप्रैल को प्रातः 9:30 बजे भव्य शोभायात्रा निकलेगी तथा 10 बजे से पावन ती...