मोक्ष नहीं तो मोक्षमार्ग तो है — मुनिश्री प्रमाणसागर गुणायतन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य समापन
मधुबन (गिरिडीह)---- विश्व प्रसिद्ध तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी की तलहटी में स्थित गुणायतन में सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मोक्ष कल्याणक" के दिव्य अवसर पर सम्पन्न हुआ।गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सात दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश, विशेषकर सिंगापुर और मलेशिया से पधारे जैन श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए भक्ति का अनुपम आनंद लिया।अंतिम दिवस प्रातःकाल कैलाश पर्वत से भगवान के मोक्षगमन का मनोहारी एवं भावविभोर कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस दौरान भगवान के शरीर के कपूर की भांति विलीन होने तथा अग्निकुमार देवों द्वारा अंतिम संस्कार की झांकी ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया अंत में हवन के माध्यम से आहुतियां देकर के इस महायज्ञ का समापन हुआ एवं रथ यात्रा निकाली गई जो कि प्रमुख मार्ग से होती हुई वापिस गुणायतन परिसर में आई सभी नव प्रतिष्ठित भगवान का अभिषेक हुआ इस अवसर पर सभी त्यागी वृति वहने उपस्थित थी।धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि,"जब-जब पंचकल्याणक के अंतिम दिवस भगवान को मोक्ष प्राप्त होता है, तो मेरे मन में एक आकुलता जागती है— प्रभु आप तो चले गए, हमारा क्रम कब आएगा?"उन्होंने कहा कि ऐसी भावना प्रत्येक साधक के अंतर्मन में जागृत होनी चाहिए।मुनिश्री ने भरत चक्रवर्ती का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान के मोक्ष जाने पर वे फूट-फूटकर रोने लगे।
जब इंद्र ने उनसे कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि अब हमें भगवान का साक्षात उपदेश सुनने का अवसर नहीं मिलेगा।मुनिश्री ने आगे कहा कि,"बंधुओं, भले ही आज मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन मोक्षमार्ग तो हमारे सामने है। जब हम इस मार्ग पर चलेंगे, तभी मोक्ष सुख की प्राप्ति संभव है।"विदेशों से आए श्रद्धालुओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सात दिनों तक सभी ने अपनी शक्ति अनुसार साधना, सेवा और भक्ति का श्रेष्ठ प्रयास किया।प्रभु भक्ति, संयम और स्वाध्याय के प्रति अनुराग ही मोक्षमार्ग को प्रशस्त करता है।गुणायतन की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि,"गुणायतन देश की पहली ऐसी संस्था है जहाँ अनेक लोग अवैतनिक सेवाएँ दे रहे हैं।"आज केभौतिकवादी युग में निःस्वार्थ भाव से धर्म प्रभावना करना ही सच्ची साधना है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि पंचकल्याणक की समाप्ति के बाद भीसंयम, स्वाध्याय और सेवा का क्रम निरंतर चलता रहना चाहिए।इस अवसर पर मुनिश्री संधान सागर, मुनिश्री सार सागर, मुनिश्री समादर सागर, मुनिश्री रूप सागर सहित चतुर्विध संघ की गरिमामयी उपस्थिति रही।समापन समारोह में पंचकल्याणक महोत्सव में सहभागी सभी प्रतिभागियों का गुणायतन के पदाधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया तथा प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए। साथ ही प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया, अभय भैया, संजय भैया,पं. सुदर्शन शास्त्री सहित प्रचार-प्रसार से जुड़े सभी माध्यमों एवं सभी सहयोगियों को मुनिश्री द्वारा आशीर्वाद प्रदान किया गया।


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